डिंडौरी(संतोष सिंह राठौर)
विकासखंड समनापुर के माध्यमिक शाला भाजीटोला में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत बगिया लगाने के नाम पर स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ का मामला सामने आया है। यहां नौनिहाल छात्र स्कूल समय में लगभग 200 मीटर दूर नाला पार कर मिट्टी लाते हुए देखे गए।
क्या है पूरा मामला?

माध्यमिक शाला भाजीटोला में विद्यालय परिसर में बगिया तैयार की जा रही थी। इसके लिए छात्र स्कूल समय में कक्षा छोड़कर विद्यालय से करीब 200 मीटर दूर नाला पार कर मिट्टी ला रहे थे।
जब हमारी टीम मौके पर पहुंची और वीडियो-फोटो लेने लगी तो प्रधानाध्यापक ने बिना अनुमति वीडियो बनाने पर आपत्ति जताई और कहा कि “उच्च अधिकारियों के आदेश से पत्रकारों को बिना परमिशन अंदर आने की मनाही है।”
जिम्मेदारों के अलग-अलग बयान
जनशिक्षक संजय कुमार सैयाम से जब पूछा गया कि छात्र नाला पार कर मिट्टी ला रहे हैं तो उन्होंने कहा “यह गलत है। छात्रों से ऐसा काम नहीं कराना चाहिए।” लेकिन जब समाचार के लिए आधिकारिक वक्तव्य मांगा गया तो उन्होंने कहा “यह ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के लिए लाया गया है।” तो वहीं शिक्षक ने कहा “छात्र अपने मन से काम कर रहे थे।”
सवाल: जिम्मेदारी किस की?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिक्षक ने छात्रों को मिट्टी लाने के लिए नहीं कहा, तो नाबालिग छात्र अपनी मर्जी से कक्षा छोड़कर 200 मीटर दूर नाला पार कैसे पहुंच गए?
स्कूल समय में बच्चों का इस तरह जोखिम भरा काम करना और नाला पार करना दुर्घटना को न्योता देने जैसा है। ऐसे में यदि कोई अनहोनी हो जाती तो इसकी जवाबदेही कौन लेता?
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार स्कूल समय में बच्चों से इस प्रकार का श्रम कार्य कराना और उन्हें परिसर से बाहर भेजना पूरी तरह नियम विरुद्ध है।
ग्रामीणों/अभिभावकों की मांग
ग्रामवासियों ने जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर से मांग की है कि मामले की जांच कराई जाए और बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
“एक पेड़ माँ के नाम” जैसा सराहनीय अभियान तभी सार्थक है जब उसमें बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि हो। पौधे लगाने के लिए बच्चों की जान जोखिम में डालना न केवल गलत है बल्कि अमानवीय भी है। प्रशासन को चाहिए कि वह स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दे कि बच्चों से कोई भी ऐसा कार्य न कराया जाए जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा हो।


