डिंडौरी(संतोष सिंह राठौर)
मध्यप्रदेश सरकार एक तरफ किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीद रही है, वहीं डिंडौरी जिले में सरकारी सिस्टम की लापरवाही से हजारों क्विंटल धान बर्बाद हो गया है। मामला वेयरहाउस निगवानी का है, जहां खुले स्टेक में रखी धान बारिश के पानी में भीगकर सड़ चुकी है। कई बोरियों में तो धान से पौधे तक उग आए हैं।तस्वीरें बता रही हैं कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी अनाज की खुली बर्बादी है।
जमीनी हकीकत – आंकड़ों में घोटाला
72 ओपन स्टेक
वेयरहाउस में करीब 72 स्टेक खुले में लगाए गए
300 बोरी प्रति स्टेक
हर स्टेक में लगभग 300 बोरी धान रखी गई थी।
15 हजार बोरी बर्बाद
मजदूरों के अनुसार करीब 15 हजार बोरियां पूरी तरह खराब होकर सड़ चुकी हैं।
लाखों का नुकसान
इस बर्बादी से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगना तय है।
अब लीपापोती: छंटाई कर मिलों में भेजा जा रहा अनाज
मामला खुलने के बाद वेयरहाउस प्रबंधन हरकत में आया है। अब मजदूर दिनभर खराब और सही धान को अलग-अलग छांटने में लगे हैं। जो धान थोड़ा ठीक लग रहा है, उसे आनन-फानन में मिलों में भेजा जा रहा है। सवाल यह है कि सड़ा-गला धान छांटकर भेजने से क्या गुणवत्ता बचेगी? क्या यही धान गरीबों के राशन में जाएगा?
सबसे बड़ा सवाल – जिम्मेदार कौन?
बारिश के मौसम में हजारों क्विंटल धान खुले में क्यों रखा गया?
समय पर त्रिपाल या सुरक्षित गोदाम की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
जब धान उगने लगा तब तक अधिकारी क्या कर रहे थे?सरकारी अनाज को इस तरह सड़ाने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
इनका कहना है
साहब बहुत बोरियां सड़ गईं हैं। पानी में भीग गई थी। अब हम छांट रहे हैं।इस धान की खरीदी इसी वर्ष हुई थी
मातादीन (मजदूर)
कई बोरियों में तो धान उग आया है। 15 हजार बोरी के आसपास खराब है। बारिश के मौसम में उठाव के कारण धान फैल गया।
शोभा लाल (मजदूर)
ओपन में लगे स्टेक में ज़ो धान रखें है और ख़राब हुए हैं, वो पुराने वर्ष 2022-23 के हैं जिसे कोकरीन कम्पनी ने ख़रीदा था ज़ो उठाव नहीं हो पाया था वहीं पड़ा है
वैधनाथ वासनिक
प्रभारी प्रबंधक सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन लिमिटेड डिंडौरी



