सहायक आयुक्त सहकारिता अरुण कुमार मसराम का रवैया भी सवालों में, पत्रकार को बोले – किसान शिकायत करे, कार्रवाई से पहले ही पल्ला झाड़ा
डिंडौरी (संतोष सिंह राठौर)-:जिले में सहकारिता विभाग के नाम पर किसानों से खुलेआम लूट का मामला सामने आया है। मामला लैंप्स पडरिया कला की उचित मूल्य दुकान नेवसा का है, जहां के प्रबंधक पीतम चंदेल की कार्यप्रणाली से किसान त्रस्त हैं,सहायक आयुक्त सहकारिता अरुण कुमार मसराम का रवैया भी सवालों में, पत्रकार को बोले – किसान शिकायत करे, कार्रवाई से पहले ही पल्ला झाडा
क्या है किसानों का आरोप?
लैंप्स अंतर्गत आने वाले गांवों के पीड़ित किसानों का कहना है कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए ऋण लेने पर शेयर की राशि निर्धारित से कई गुना अधिक वसूली की जाती है। उसकी रसीद तक किसानों को नहीं दी जाती।
स्टेशनरी के नाम पर लूट
स्टेशनरी के नाम पर भी मनमानी राशि वसूली जाती है, जिसकी भी कोई रसीद नहीं दी जाती।यह हम नहीं, बल्कि लैंप्स से जुड़े दर्जनों पीड़ित किसान खुद कह रहे हैं।
सहायक आयुक्त का गैर-जिम्मेदाराना जवाब
जब इस संबंध में सहायक आयुक्त सहकारिता अरुण कुमार मसराम से बात की गई, तो उनका रवैया बेहद निराशाजनक रहा। उन्होंने समाचार को महत्व न देते हुए कहा कि संबंधित किसान शिकायत करे। मामले पर कुछ कहने से साफ इंकार कर दिया।इससे साफ पता चलता है कि चौथे स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता के प्रति सहायक आयुक्त महोदय के मन में कितना सम्मान है।बाद में जब एक किसान की लिखित शिकायत सौंपी गई , तब जाकर उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया। जानकारी के अनुसार अब शिकायत के आधार पर जांच टीम गठित की गई है।
आरोपी प्रबंधक ने फोन काटा
जब इस पूरे मामले में लैंप्स प्रबंधक पीतम चंदेल से पक्ष लेने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने व्यस्त होने का हवाला देकर जानकारी देने से इंकार करते हुए फोन काट दिया। इससे आरोप और भी गहरे हो जाते हैं।
किसानों की मांग –
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी प्रबंधक पीतम चंदेल को तत्काल हटाया जाए और किसानों से अवैध रूप से ली गई राशि की रसीद दिलाई जाए।अब देखना होगा कि जांच टीम क्या सच्चाई सामने लाती है और क्या वाकई किसानों को न्याय मिलता है या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा।
इनका कहना है
लेंप्स प्रबंधक पीतम चंदेल के द्वारा कार्यालय आने वालों किसानों से ठीक तरह से बात नहीं कि जाती है,किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेने के लिए आवेदन करने पर निर्धारण से अधिक की राशि शेयर के रूप में ली जाती है और तो और उसका रसीद तक नहीं दिया जाता है, इसी तरह स्टेशनरी की राशि भी 200,500 रूपये तक ली जाती और उसका भी रसीद नहीं दी जाती है।
चेत राम नागेश मोहगांव रैयत



