Dindori

गांव की बहू बनी नौनिहालों की शिक्षिका, बच्चों का भविष्य संवारने में जुटी पार्वती

बिना पद, बिना वेतन के स्कूल में पढ़ा रही 'मैडम पार्वती', ग्रामीण कर रहे सलाम

करंजिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बरनई के भीतर टोला का मामला

डिंडौरी(संतोष सिंह राठौर)-:
डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बरनई के भीतर टोला स्थित सेटेलाइट प्राथमिक शाला में गांव की एक बहू आज बच्चों के लिए मिसाल बन गई है।
स्कूल में एक शिक्षक और एक शिक्षिका पदस्थ हैं। लेकिन किसी दिन उनके आने में देरी हो जाए या तबियत खराब हो, तो गांव की बहू पार्वती मरावी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले लेती हैं।

कैसे बनी,मैडम पार्वती

स्कूल के बगल में रहने वाली पार्वती मरावी 12वीं तक पढ़ी हैं। उनका अपना बच्चा भी इसी स्कूल में पढ़ता है।
पार्वती बताती हैं बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए मैं स्कूल आ जाती हूं। अपने बच्चे के साथ-साथ दूसरे बच्चों को भी पढ़ाती हूं। बच्चों की नींव अगर मजबूत हो, तो आगे की पढ़ाई में उन्हें परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
शुरुआत में सिर्फ अपने बच्चे के लिए आईं पार्वती को देखकर दूसरे बच्चे भी उनके पास जमा होने लगे। अब स्कूल के नौनिहाल उन्हें प्यार से मैडम कहते हैं।

बच्चे और ग्रामीण क्या कहते हैं

बच्चों का कहना है पार्वती मैडम हमें अच्छी तरह पढ़ाती हैं। उनके पढ़ाने से हम खुश हैं और बहुत कुछ सीखते हैं।
पार्वती का बच्चों को पढ़ाने का यह जुनून देखकर पूरे गांव के लोग उनकी सराहना कर रहे हैं। ग्रामीण कहते हैं कि ऐसी सोच हर घर में हो तो गांव का भविष्य अपने आप संवर जाएगा।

प्रेरणा का उदाहरण

बिना किसी पद, वेतन या सरकारी आदेश के, गांव की बहू द्वारा बच्चों की शिक्षा के लिए उठाया जा रहा यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
पार्वती मरावी ने साबित कर दिया है कि बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी बेहद जरूरी है।

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