डिंडौरी (संतोष सिंह राठौर):प्रशासन एक तरफ नशामुक्ति का संदेश देने और जनजागरूकता के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर हस्ताक्षर अभियान और जागरूकता रथ चला रहा है, वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालय में ही प्रतिबंध के बावजूद अवैध शराब बेधड़क बिक रही है।
Oplus_16908544जिला मुख्यालय की गली-मोहल्लों में खुलेआम शराब की बिक्री हो रही है। नतीजा यह है कि जगह-जगह देश के भविष्य कहे जाने वाले युवा नशे में धुत पड़े मिल जाते हैं। शाम ढलते ही कई इलाकों में शराबियों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे आम लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है।सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब जिला प्रशासन अपने नाक के नीचे, जिला मुख्यालय में ही अवैध शराब की बिक्री पर रोक नहीं लगा पा रहा, तो करोड़ों खर्च कर नशामुक्ति अभियान, हस्ताक्षर अभियान और जागरूकता रथ चलाने का क्या औचित्य है?प्रशासन के बड़े-बड़े दावों और करोड़ों के खर्च के बीच जमीनी हकीकत यह है कि प्रतिबंधित शराब आसानी से युवाओं तक पहुंच रही है। ऐसे में सिर्फ कागजी अभियानों और फोटो सेशन से नशामुक्ति का लक्ष्य कैसे हासिल होगा, यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक अवैध शराब के कारोबार पर सख्ती से लगाम नहीं लगेगी, तब तक जागरूकता अभियानों का कोई मतलब नहीं निकलेगा। पहले तस्करों और विक्रेताओं पर कार्रवाई हो, फिर जनता को जागरूक किया जाए।