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डिंडौरी: करोड़ों के आशियाना खंडहर में तब्दील, गांगपुर का आवासीय परिसर बदहाल

डॉक्टर-नर्सों के लिए बने 18 आवास वीरान, बिजली-पानी के बिना भाग रहे कर्मचारी

डिंडौरी(संतोष सिंह राठौर)-:
सरकार के करोड़ों रुपये किस तरह बर्बाद हो रहे हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण है जिला मुख्यालय के पास गांगपुर में बना स्वास्थ्य विभाग का आवासीय परिसर।करीब तीन साल पहले डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के लिए करोड़ों की लागत से बनाए गए ये आलीशान आवास आज मूलभूत सुविधाओं के अभाव में खंडहर बनने की कगार पर हैं।

18 आवास बने, लेकिन एक भी रहने लायक नहीं!

9 आवास डॉक्टरों के लिए,8 आवास स्टाफ नर्सों के लिए,1 आवास सिविल सर्जन के लिए

भवन निर्माण का यह रहा उद्देश्य उद्देश्य -: स्वास्थ्य कर्मियों को बेहतर आवास देना ताकि वे मुख्यालय में रहें और मरीजों को 24 घंटे सेवा मिले। लेकिन हकीकत इसके उलटा है।

बिजली-पानी के बिना कैसे रहें?

परिसर में रहने को मजबूर कर्मचारियों की आपबीती रोंगटे खड़े कर देती है।
एक-एक, दो-दो दिन तक बिजली गायब रहती है।नल में पानी नहीं, टैंकर का भरोसा।परिसर तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं।बाउंड्री वॉल नहीं होने से असुरक्षा का माहौल।यही कारण है कि यहां रहने आए डॉक्टर और नर्स 2-3 महीने में ही आवास छोड़कर शहर में किराए के मकान में रहने को मजबूर हो जाते हैं।

वार्ड बॉय की जुबानी दर्द

करीब एक साल से यहां रह रहे वार्ड बॉय इंद्रजीत सिंह वरकड़े ने बताया,यहां पानी और बिजली की बहुत बड़ी समस्या है। कई बार 1-2 दिन तक लाइट नहीं आती। सड़क नहीं है, बाउंड्री वॉल नहीं है। शासन से निवेदन है कि यहां सड़क और बाउंड्री वॉल बनवाई जाए और बिजली-पानी की व्यवस्था सुधारी जाए।करोड़ों की लागत से बना यह परिसर आज वीरान पड़ा है। खिड़की-दरवाजे टूटने लगे हैं, झाड़ियां उग आई हैं। यदि समय रहते विभाग ने ध्यान नहीं दिया तो यह पूरा परिसर भ्रष्टाचार और लापरवाही का स्मारक बन जाएगा।बड़ा सवाल – जब डॉक्टर ही मुख्यालय में नहीं रहेंगे तो रात में इमरजेंसी में मरीजों का क्या होगा?

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