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सड़क नहीं, खेल मैदान नहीं, फिर भी मिली माध्यमिक की मान्यता

कीचड़ भरे रास्ते से आ-जा रहे नौनिहाल, जिम्मेदार अधिकारी सवालों के घेरे में

विकास खंड समनापुर अंतर्गत माध्यमिक विद्यालय समनापुर का मामला

डिंडौरी(संतोष सिंह राठौर)-:
करंजिया विकासखंड के ग्राम समनापुर स्थित रविंद्र नाथ टैगोर माध्यमिक विद्यालय शिक्षा विभाग की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। जिस विद्यालय तक पहुंच मार्ग तक नहीं है, न खेल मैदान है, न मूलभूत सुविधाएं हैं, फिर भी उसे माध्यमिक विद्यालय तक की मान्यता कैसे मिल गई? यह सबसे बड़ा सवाल है।

जमीनी हकीकत क्या है

कीचड़ भरे रास्ते से जाने मजबूर नौनिहाल-: स्कूल तक जाने के लिए कोई पक्की सड़क या पगडंडी नहीं है। बरसात में 500 मीटर का रास्ता घुटनों तक कीचड़ से भर जाता है। बच्चे गिरते-पड़ते, भीगते हुए स्कूल पहुंच रहे हैं। कई बार कॉपी-किताब भी कीचड़ से खराब हो जाती हैं।

कोई खेल मैदान नहीं-: मानकों के अनुसार माध्यमिक स्कूल में खेल मैदान अनिवार्य है, लेकिन यहां बच्चों के खेलने तक की जगह नहीं है।

अन्य सुविधाओं का अभाव-:शौचालय, पेयजल और सुरक्षित भवन को लेकर भी अभिभावक सवाल उठा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल – मान्यता कैसे मिली?
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का सीधा आरोप है कि बिना जमीनी सत्यापन के, सिर्फ कागजों के आधार पर स्कूल को मान्यता दे दी गई।

ग्रामीणों का कहना है-: जब बच्चों के आने-जाने का रास्ता ही नहीं है, तो पढ़ाई कैसे होगी? अधिकारी एक बार आकर देखें तो हकीकत सामने आ जाएगी।
अब शिक्षा विभाग के उन जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है जिन्होंने निरीक्षण के बाद इस स्कूल को माध्यमिक स्तर की मान्यता प्रदान की।

अभिभावक और ग्रामीण आक्रोशित

अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि, स्कूल की मान्यता प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।तुरंत स्कूल तक पक्का पहुंच मार्ग और खेल मैदान की व्यवस्था की जाए।जब तक सुविधाएं नहीं होतीं, तब तक अस्थायी रूप से बच्चों की सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं।
ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।

नोट -: जानकारी लेने बी आर सी महोदय समनापुर मदन सोनवानी जी से संपर्क किया गया लेकिन महोदय जी के द्वारा फोन नहीं उठाया गया

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